immune system in hindi

Immune System क्या है ? यह Coronavirus से किस प्रकार सम्बंधित है ?

Immune System in Hindi : हर लम्हा हर पल हमारे शरीर पर हज़ारों bacteria, fungus ओर virus अटैक करते रहते हैं जिसको रोकने के लिए हमारे शरीर ने एक रोधक क्षमता बना रखी है जिसे हम रोग प्रतिरोखक क्षमता या Immune System के नाम से जानते हैं । जो की हमारे शरीर में एक सेना या आर्मी की तरह होती है जिसमें छोटे छोटे सैनिक, चौकीदार , inteligence, हथियार और कम्यूनिकेशन सिस्टम शामिल होते हैं। जो हमको बीमार, बहुत बीमार और मरने से लगातार बचाते रहते हैं।

Immune System के कार्य

आसानी से समझने के लिए हम ये मान सकते हैं की हमारे immune सिस्टम के 11 अलग अलग प्रकार के कार्य निर्धारित होते हैं –

  • Cause-inflammation (सूजन लाना)
  • Strategic Decisions (फ़ैसला लेना)
  • Kills Enemy (वाइरस को ख़त्म करना)
  • Activate other cells (अन्य कोशिकाओं को सक्रिय करना)
  • Remember Enemies (दुश्मनों को याद रखना)
  • Standby mode (समर्थन करना)
  • Produce Antibodies (एंटीबॉडी का उत्पादन करना)
  • Locate Foreign Bodies (विदेशी निकायों का पता लगाना)
  • Fight Worms (कीड़ों से लड़ना)
  • Kill Infected Cells (संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करना)
  • Mark / Disable Enemies (चिन्हित करके दुश्मन को निष्क्रिय करना)

 

जिसमें की 21 अलग अलग cells होते हैं और इन cells के पास 4 अलग अलग कार्य होते हैं। तो चलिए जानते है कि वो कौन कौन से कार्य होते हैं-

  • Kill Enemies (वायरस को ख़त्म करना)
  • Cause Inflammation (सूजन लाना)
  • Communicate (संवाद करना)
  • Activate Cells (कोशिकाओं को सक्रिय करना)

जब इन्फ़ेक्शन होता है तो क्या होता है

मान लीजिए कि किसी दिन आप की ऊँगली में एक पुरानी जंग लगी नुकीली कील से चोट लग जाती है और ख़ून बहने लगता है यानी रक्षा प्रणाली की पहली परत भेद दी गई है और nepa bacteria इस अवसर को भुनाते हुए आप के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। और आप के शरीर के साधनो का इस्तेमाल करके हर २० मिनट में अपनी जनसंख्या को दो गुनी करने लगते है ।

जब इन bacteria की संख्या काफ़ी बढ़ जाती है तो ये शरीर को नुक़सान पहुंचाते हुए अपने आस पास की चीज़ों को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं। जिसके कारण से हमारे immune system को तुरंत ही इसका हल सोचने की ज़रूरत पड़ जाती है। इसीलिए सबसे पहले macrophage यानी की बृहतभक्षककोशिका सक्रिय हो जाती हैं जिनको की guard cells भी कहा जा सकता है।

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Guard cells काफ़ी बड़ी कोशिका होती हैं जो शरीर में हर जगह मौजूद रहती हैं। ज़्यादातर समय ये अकेले ही किसी भी वायरस या bacteria से बचाव कर सकने में सक्षम होती हैं क्योंकि ये virus अथवा bacteria को निगल के उनको समाप्त कर देती हैं।

उसके अलावा ये उस क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए ब्लड cells को पानी छोड़ने का निर्देश जारी करते हैं जिसको हम उस हिस्से में सूजन के तौर पे महसूस करते हैं।

जब macrophage cells कमज़ोर पड़ने लगते हैं तो वो messanger प्रोटीन रिलीज़ करते हैं जो की एक प्रकार का इमर्जेन्सी लोकेशन सिग्नल होता है जो की हमारे रक्त/ ब्लड मैं मौजूद neutrophils यानी की एक प्रकार के white blood cells को सचेत कर के बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बुला लेता है। neutrophils इतने घातक तरीक़े से लड़ते हैं की वे इस प्रक्रिया में कुछ healthy cells को भी मार देते हैं।

साथ ही ये जाल बिछा के bacteria को क़ैद कर लेते हैं और bacteria का ख़ात्मा कर देते हैं। लेकिन अगर फिर भी bacteria बच जाते हैं तो immune system की एक ओर प्रक्रिया चालू होती है जिसे dendritic cell कहा जाता है जो की bacteria के सैम्पल इकट्ठा करना शुरू कर देता है। जिसमें ये bacteria के टुकड़े कर के अपनी बाहरी परत पे लगा लेता है।

फिर dendritic cell ये आंकलन करता है की उसको antivirus cells को बुलाना है या antibacteria cells को बुलाना है । इस किस्से में antibacterial cells को बुलाया जाएगा, जिनको बुलाने के लिए dendritic cell अपने स्थान से सबसे क़रीबी lymph note / छोटी लसिका ग्रंथि तक का सफ़र शुरू करती हैं जो की एक दिन में पूरा होता है।

यंहाँ पे हज़ारों की तादाद में helper ओर killer T-Cells activate होने का इंतज़ार करते रहते हैं। जबकि dendritic cell एक ऐसे helper T-cell की तलाश में घूमता है जो की dendritic cell के बाहरी परत में bacteria के टुकड़ों से मेल खाता हो।

जब वो helper T-Cell मिल जाता है तो एक chain reaction शुरू हो जाता है जिसमें T-Cell अपनी जैसी हज़ारों कापीज़ बनाना शुरू कर देता है जिसमें से कुछ memory T-Cells बन जाते हैं, जो की limph node में ही रह जाते हैं ताकि भविष्य मैं किसी ऐसी बीमारी से तुरंत निपटा जा सके ।

इनमे से कुछ helper T-Cell तो bacteria से लड़ने पहुंच जाते है जबकि एक टुकड़ी limph note के सेंटर में जा के एक बहुत ही शक्तिशाली हथियार को चालू करते हैं। जिनको B-Cells कहा जाता है। जब एक ही प्रकार के B-Cell ओर T-Cell मिलते हैं तो B-Cells बहुत तेज़ी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं और तुरंत ही एक घातक पदार्थ बनाना शुरू कर देते हैं।

ये इतना ज़्यादा काम करते हैं कि इनकी हालत थकान से मरने जैसी हो जाती है , जहाँ पर helper T-Cells एक ओर भूमिका निभाते हैं ओर B-Cells को stimulate करते रहते हैं जिससे B-Cells जल्दी मारे नहीं। लेकिन जो B-Cells हथियार बनाता हे उसको Antibodies कहते हैं।

Antibodies छोटे protiens होते हैं जो की bacteria की बाहरी परत से अपने आप को बाँध लेते हैं। Antibodies हज़ारों की तादाद में ख़ून में मिल जाते हैं। तब तक infection वाली जगह की स्थिति बिगड़ने लगती है क्योंकि जो cells अभी तक लड़ रहे थे वो थकने लगते हैं, तब हेल्पर T-Cell उनको मदद करते हैं लेकिन बिना मदद के ये bacteria को हरा नहीं पाते हैं।

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इसलिए अरबों की तदात में antibodies इन्फ़ेक्शन वाले स्थान पे पहुंचने लगती है और bacteria को ख़त्म करना शुरू कर देती है क्योंकि antibodies की बनावट कुछ इस प्रकार होती है की वो bacteria की सतह को एक से जकड़ सके, जबकि macrophage ऐसे bacteria जिनको antibodies ने जकड़ रखा हो ,को मारने में काफ़ी क़ाबिल होती हैं और बस यंही से स्थिति पलटनी शुरू हो जाती है ओर bacteria हमारे immune system की सेना से हार जाता है।

बाक़ी सारे cells जो लड़ाई में शामिल हुए थे आत्महत्या कर लेते हैं ताकि शरीर के साधनो का बचाया जा सके। ज़िंदा रहते हैं तो बस Memory Helper T-Cells ओर Memory B-Cells ,ताकि अगर भविष्य में कभी भी ये bacteria दोबारा शरीर में प्रवेश हुआ तो इनको इसे मारने में कोई भी परेशानी नहीं होगी ओर हमको बिना पता हुए ही ये T/B-Cells bacteria का ख़ात्मा चुटकियों में कर देंगे।

दोस्तों , ये था एक आसान तरीक़ा हमारे immune system को समझने का लेकिन हमारा immune system इससे भी कई गुना ज़्यादा पेचीदा ओर क़ाबिल है किसी भी virus या bacteria से लड़ने में। आशा करता हूँ आपको आज का ये पोस्ट काफी पसंद आया होगा।

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